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ये कुर्सियां साल 1939 में पोलैंड की एक शादी में मेहमानों के लिए रखी गई थीं, पर अचानक दूसरा विश्वयुद्ध शुरू हो गया और जर्मनी ने पोलैंड पर हमला कर दिया। इसके बाद लोग आयोजन को छोड़कर चले गए। कई साल बाद पता लगा कि उस जगह पर रखी कुर्सियों के बीच में से पेड़ निकल आए हैं। तबसे इन कुर्सियों को हर साल पेंट किया जाता है।