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हमारी पड़ताल में साफ है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का लगभग 10 साल पुराना वीडियो भ्रामक दावे के साथ शेयर किया गया है. उन पर लाठीचार्ज सितंबर, 2015 में गणेश प्रतिमा के विसर्जन को लेकर हुआ था.